खुद की पार्टी बना कर अपनी सियासी हसरतें पूरी करने का चलन चुनावों की आहट के साथ तेज होता जा रहा है। महीने भर में जहां दो पूर्व नौकरशाह ने अपनी नई पार्टी का एलान कर दिया, तो वहीं सियासी राह मेें भटकते हुए अनुभवी हो चुके पूर्व नौकरशाह दलबदल कर अपनी मंजिल पाने में जुट गए हैं। चुनावी इतिहास गवाह है कि राज्य में नौकरशाहों को सियासी कामयाबी ज्यादा नहीं मिली। इसके उलट डीएम रहे कई अधिकारी उसी जिले से चुनाव लड़ने पहुंचे तो जनता ने नकार दिया।
अफसर से माननीय बनने की होड़: किसी ने बनाई पार्टी, किसी ने बदला दल; क्या वोटों में बदलेगा प्रशासनिक रुतबा?

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