'ट्रक रोका, एफिडेविट छीनने की कोशिश', ऋतब्रत बनर्जी का आरोप, ममता पर तंज

'ट्रक रोका, एफिडेविट छीनने की कोशिश', ऋतब्रत बनर्जी का आरोप, ममता पर तंज

तृममूल कांग्रेस के दो गुटों में चल रही लड़ाई फिलहाल थम नहीं सकी है. इस मामले में नया मोड़ आ गया है. टीएमसी के बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने सोमवार (26 अक्टूबर) सुबह सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि चुनाव आयोग में एफिडेविट जमा कराने जा रहे कार्यकर्ताओं को रोका गया और उनसे दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई. ऋतब्रत ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तंज भी कसा.

ऋतब्रतने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कालीघाट का जिक्र किया. उन्होंने एक्स पर लिखा, '25 तारीख की शाम को चार्टर्ड फ्लाइट से 'कालीघाट'के हलफनामे दिल्ली पहुंचाए गए हैं. जबकि हमारे एफिडेविट सड़क के रास्ते दिल्ली ले जाए जा रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा कराने के लिए हमारे कार्यकर्ता 24 तारीख की सुबह ही दस्तावेजों के साथ निकल चुके थे.'

Chartered Flight has carried Kalighat's affidavits to Delhi on 25 th evening. Our Affidavits are being transported to Delhi by road. Our workers have started with our documents on 24 th morning for depositing in ECI. Half an hour ago there were attempts to take control of the truck and snatch our documents. Our workers have resisted bravely. The fight is on. A fight between Chartered Culture versus Grass Root resolve. Despots will not succeed in their attempt of organised loot in every sphere. @ECISVEEP @DelhiPolice @dtptraffic @police_haryana - Ritabrata Banerjee (@RitabrataBanerj) October 25, 2026

ऋतब्रत ने लिखा, 'अभी आधे घंटे पहले ट्रक पर कब्जा करने और हमारे दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई. हमारे कार्यकर्ताओं ने बड़ी बहादुरी से इसका मुकाबला किया है. लड़ाई जारी है, यह लड़ाई 'चार्टर्ड संस्कृति' और 'जमीनी हकीकत' के बीच की है. तानाशाही करने वाले लोग संगठित लूट की अपनी इस कोशिश में कभी कामयाब नहीं होंगे.'

क्या है पूरा मामला

दरअसल बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में फूट पड़ गई और पार्टी दो गुटों में बंट गई. एक गुट ममता बनर्जी का है तो दूसरा ऋतब्रत बनर्जी का है. इन दोनों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा ठोका था, जो कि चुनाव आयोग तक पहुंच गया. चुनाव आयोग ने नाम और चिन्ह को फ्रीज करके दोनों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह अलॉट कर दिए. इसके साथ ही दोनों को पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा करने के लिए सबूत पेश करने के लिए कहा.

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