'कदीमी मस्जिद को हटाना होगा', दिल्ली HC में केंद्र सरकार बोली- मलिकाना हक हमारा

'कदीमी मस्जिद को हटाना होगा', दिल्ली HC में केंद्र सरकार बोली- मलिकाना हक हमारा

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में जवाब देते हुए कहा है कि सेंट्रल दिल्ली में कृषि भवन परिसर के भीतर कदीमी मस्जिद को हटाना बेहद ही जरूरी है. ऐसा सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान के तहत कॉमन सेंट्रल सचिवालय की इमारतों के 4-5 के पुनर्विकास और पुनिर्माण कार्य को सुगम बनाने के के लिए किया जा रहा है. 

ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि एवं विकास कार्यालत के माध्यम से दायर एक स्टेटस रिपोर्ट में केंद्र सरकार ने कहा है कि यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है. 8 नवंबर 1940 को एक समझौते के तहत इसकी देखरेख करने वाली समिति को इस परिसर का केवल अनुमति आधारित कब्जा दिया गया था. 

केंद्र का तर्क-प्रबंधन समिति को नहीं मालिकाना हक

केंद्र ने तर्क दिया है कि इस समझौते से प्रबंधन समिति को संपत्ति का कोई मालिकाना हक, अधिकार या हित प्राप्त नहीं हुआ था. केंद्र की तरफ से यह स्टेटस रिपोर्ट कदीमी मस्जिद की देखरेख करने वाली समिति की तरफ से दायर याचिका को लेकर दाखिल की गई. इससे पहले 17 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया था. सरकार ने याचिकाकर्ता के दावे को खारिज कर दिया है. साथ ही कहा है कि ये आधिकारिक रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते हैं. 

सरकार ने 1940 के समझौते का दिया हवाला

L& DO के मुताबिक, यह मस्जिद कृषि भवन परिसर के भीतर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर प्लॉट नंबर 120 पर स्थित है. यह जमीन भारत सरकार की है. आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि एवं विकास कार्याल के प्रशासनिक कंट्रोल में है. केंद्र सरकार ने 9 नवंबर 1940 के एक समझौते के हवाला दिया. यह उस समय के भारत सरकार और जामा मस्जिद प्रबंध समिति के सचिव के बीच हुआ था. इसके तहत सरकार ने समिति को यह परिसर केवल मस्जिद के रूप में उपयोग करने के लिए दिया था. समझौते में संपत्ति के उपयोग और उसमें बदलाव को लेकर भी प्रतिबंध लगाए थे. इसमें कहा गया था कि प्रबंध समिति सरकार की पूर्व लिखित अनुमति के बिना, मौजूदा इमारतों में कोई बदलाव नहीं कर सकती. मरम्मत नहीं कर सकती. कब्रें नहीं बना सकती. कोई नया स्ट्रक्चर नहीं खड़ा कर सकती.

जगह का इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक उद्देश्य के लिए: केंद्र

कोर्ट को बताया गया कि इस जगह का इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक उद्देश्यों के रूप में ही किया जा सकता है. इसके अलावा प्रबंध समिति को नगर निगम, स्वच्छता, भवन निर्माण और अन्य संबंधित नियमों का पालन करना अनिवार्य किया था. इसके अलावा समझौते में कहा गया था कि अगर किसी तरह का उल्लंघन किया जाता है, तो सरकारी अधिकारियों को इस संपत्ति का कब्जा वापस लेने का अधिकार होगा. 

इस पूरे मामले में केंद्र की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और सेंट्रल गवर्नमेंट स्टैंडिंग काउंसिल निशान गौतम पेश हुए. वहीं, कदीमी मस्जिद की तरफ से सीनियर वकील सलमान खुर्शीद और उनके साथ वकील इबाद मुश्ताक और फुजैल अहमद अय्यूबी ने पक्ष रखा.

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