पंजाब में बीते लोकसभा चुनाव में अलगाववाद की राजनीति ने मजबूत दस्तक दी थी। अब विधानसभा चुनाव में यही राजनीति राज्य के सियासी समीकरण को उलझा सकती है। दरअसल राज्य के माझा और मालवा क्षेत्र में जमीनी स्तर पर सक्रिय अकाली दल (वारिस पंजाब दे) की मजबूत चुनावी तैयारी से सूबे के दल सतर्क हैं। माना जा रहा है कि अगर विस चुनाव में भी अलगाववादी राजनीति ने इन दो क्षेत्रों में अपना प्रभाव छोड़ा तो त्रिशंकु जनादेश की भी स्थिति बन सकती है।
विधानसभा चुनाव : अलगाववाद उलझाएगा पंजाब का सियासी समीकरण, अमृतपाल के दल से सभी सतर्क; किसने-कितनी ताकत झोंकी?

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