सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) की आलोचना करते हुए कहा कि वह पूरी तरह भटक गया है और उसने न्यायिक अनुशासन का घोर उल्लंघन किया है। कोर्ट ने यह टिप्पणी दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) से जुड़े अपने एक आदेश की समीक्षा करने के लिए न्यायाधिकरण को आड़े हाथों लेते हुए की। जस्टिस जेबी पारदीवाला व जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि न्यायाधिकरण ने संविधान के अनुच्छेद 141 में तय किए गए सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। पीठ ने कहा, हमें यह कहना पड़ रहा है कि ट्रिब्यूनल पूरी तरह से भटक गया है। इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल के लिए हम माफी चाहते हैं, लेकिन अपनी नाराजगी जताने के लिए हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है। ट्रिब्यूनल ने उस मामले की समीक्षा की अनुमति दे दी, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही पिछले वर्षों के लिए सुलझा चुका था। शीर्ष अदालत ने ट्रिब्यूनल के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के 2019 के मूल फैसले के खिलाफ था। उस फैसले में डीवीसी को बिजली टैरिफ के जरिये अपने सिंकिंग फंड में किए गए योगदान की वसूली करने की अनुमति दी गई थी। सिंकिंग फंड भविष्य के किसी तय खर्च या वित्तीय जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए अलग से रखा गया फंड होता है।
सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स: अदालत विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण से नाराज, कहा- पूरी तरह भटक गया है एपीटीईएल

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