सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिकाकर्ता को अनुमति दी कि वह देश भर के हाई कोर्ट में मामलों के नामकरण, पंजीकरण की प्रक्रियाओं और न्यायिक शब्दावली में एकरूपता लाने के लिए कोर्ट की ई-समिति को अपना पक्ष (रिप्रेजेंटेशन) सौंप सकता है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक आंकड़ों तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ई-समिति पहले से ही मामलों के वर्गीकरण को मानकीकृत (स्टैंडर्डाइज) करने की पहल पर काम कर रही है। इसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मुद्दे पर अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर न्यायिक पक्ष से सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि, पीठ ने उपाध्याय को अपनी याचिका शीर्ष अदालत की ई-कमेटी के समक्ष प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी।
सुप्रीम कोर्ट: अदालतों में मुकदमों की पहचान होगी आसान? एक समान न्यायिक व्यवस्था की मांग ई-कमेटी तक पहुंची

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