बंधुआ मजदूरी से मुक्ति मिलने के बाद भी मजदूरों को अगर आर्थिक मदद और रोजगार का सहारा नहीं मिलता है तो वे दोबारा शोषण के जाल में फंस सकते हैं। इसी चिंता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बंधुआ मजदूरी खत्म करने से जुड़े कानून और पुनर्वास योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि संविधान में बंधुआ मजदूरी पर रोक लगाने का प्रावधान सिर्फ कागजों पर लिखी बात बनकर नहीं रह सकता। मजदूरों को शोषण से मुक्त कराना ही सरकार की जिम्मेदारी पूरी होने के लिए काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मान से जीवन जीने के लिए जरूरी मदद भी देनी होगी। अदालत ने केंद्र को छह महीने के भीतर इस संबंध में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट: 'बंधुआ मजदूरी पर रोक सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रह सकती', अदालत ने केंद्र को क्या निर्देश दिए?

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