एक्सप्लेनर: दिल्ली में सात दशक पहले लग गया था हवा घातक होने का अनुमान, निपटने के लिए उठे कितने कदम; क्यों नाकाम?

एक्सप्लेनर:                                   दिल्ली में सात दशक पहले लग गया था हवा घातक होने का अनुमान, निपटने के लिए उठे कितने कदम; क्यों नाकाम?

दिल्ली में हर साल सर्दी का सीजन शुरू होने के साथ ही वायु प्रदूषण का खतरा लोगों में डर पैदा कर देता है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए। दरअसल, जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है, वैसे ही सरकार, चिकित्सकों और विशेषज्ञों की तरफ से स्वास्थ्य चेतावनियां जारी कर दी जाती हैं। लोगों को मास्क पहनकर निकलने या घर पर ही रहने की सलाह दी जाती है, ताकि उनके फेफड़े हवा में मौजूद छोटे कणों (पीएम 2. 5 और पीएम 10) से प्रभावित न हों। हालांकि, जो डर आज सरकार से लेकर आम लोगों तक फैला है, वह न तो आधुनिक समय का है और न ही इससे जारी जंग हालिया वक्त की है। अगर अवधि और डेटा की बात की जाए तो सामने आता है कि 1950 के दशक में ही राजधानी की हवा को लेकर चिंता जता दी गई थी और अगले कुछ साल ऐसी ही चेतावनियों और हवा ठीक करने की कोशिशों का दौर जारी रहा।

amarujala.com पर पूरी खबर पढ़ें

सुझाई गई

सामान्य

'बच जाएगी मेरी शादी?' क्या टूटने वाला है Swara Bhasker का रिश्ता? मुस्लिम पति फहाद अहमद को लेकर फूट-फूटकर रोईं

सामान्य

गर्लफ्रेंड की इंगेजमेंट रिंग बनाने के लिए महीनों तक नदी में सोना खोजता रहा शख्स, इंटरनेट पर वायरल हुई कहानी

सामान्य

कर्नाटक में गन्ना किसानों को राहत मिलने के आसार: सीएम शिवकुमार ने कहा- बातचीत सफल रही, केंद्र पर क्या बोले?