दिल्ली में हर साल सर्दी का सीजन शुरू होने के साथ ही वायु प्रदूषण का खतरा लोगों में डर पैदा कर देता है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए। दरअसल, जैसे-जैसे हवा की गुणवत्ता खराब होती है, वैसे ही सरकार, चिकित्सकों और विशेषज्ञों की तरफ से स्वास्थ्य चेतावनियां जारी कर दी जाती हैं। लोगों को मास्क पहनकर निकलने या घर पर ही रहने की सलाह दी जाती है, ताकि उनके फेफड़े हवा में मौजूद छोटे कणों (पीएम 2. 5 और पीएम 10) से प्रभावित न हों। हालांकि, जो डर आज सरकार से लेकर आम लोगों तक फैला है, वह न तो आधुनिक समय का है और न ही इससे जारी जंग हालिया वक्त की है। अगर अवधि और डेटा की बात की जाए तो सामने आता है कि 1950 के दशक में ही राजधानी की हवा को लेकर चिंता जता दी गई थी और अगले कुछ साल ऐसी ही चेतावनियों और हवा ठीक करने की कोशिशों का दौर जारी रहा।
एक्सप्लेनर: दिल्ली में सात दशक पहले लग गया था हवा घातक होने का अनुमान, निपटने के लिए उठे कितने कदम; क्यों नाकाम?

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