इन दिनों हर तरफ एआई को लेकर काफी चर्चा है। कोई इसे दुनिया बदलने वाली तकनीक बता रहा है, तो कुछ एक्सपर्ट का यह तक कहना है कि ये तकनीक दशक के अंत तक इंसानों को खत्म कर सकती है। गूगल, मेटा, ओपनएआई जैसी बड़ी टेक कंपनियां इस दौड़ में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। अरबों डॉलर के निवेश हो रहे हैं, नए स्टार्टअप सामने आ रहे हैं और एआई को लेकर उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। हालांकि, गौर करने वाली बात ये है कि इस चमकती तस्वीर के पीछे एक ऐसा सवाल भी खड़ा है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं है। क्या एआई से होने वाली कमाई और उसकी वास्तविक कारोबार करने की क्षमता उतनी ही बड़ी है, जितनी बड़ी उम्मीदें उससे लगाई जा रही हैं?
एआई: क्या है एआई बबल? बेहिसाब निवेश, जमीनी हकीकत और भविष्य को लेकर क्या है संकट?

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