जब संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया पर ताकतवर एंटीबायोटिक दवाएं भी बेअसर होने लगती हैं, तो गंभीर मरीजों का इलाज बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे मरीजों के लिए सेफेपिम-जिडेबैक्टम दवाओं के मेल से उम्मीद जगी है। भारत समेत कई देशों के अस्पतालों में हुए एक अध्ययन में इस दवा से इलाज पाने वाले 60 मरीजों में से 91. 7 फीसदी को चिकित्सकीय रूप से ठीक पाया गया। हालांकि, यह शुरुआती नतीजा है और इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए आगे भी अध्ययन जरूरी हैं। अध्ययन में कुल 72 वयस्क मरीजों को दवा दी गई। इनमें 68 मरीजों में ऐसे बैक्टीरिया का संक्रमण था, जिन पर कार्बापेनेम समूह की एंटीबायोटिक दवाएं असर नहीं कर रही थीं। इनमें से 56 मरीजों में संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया मेटालो-बीटा-लैक्टामेज (एमबीएल) नाम का एंजाइम बना रहे थे।
अच्छी खबर: ताकतवर एंटीबायोटिक बेअसर, नई दवा के मेल से 92 फीसदी मरीजों को राहत

