सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (4 नवंबर, 2026) को केंद्र सरकार और चुनाव आयोग (ECI) को एक याचिका को लेकर नोटिस जारी किया है. अदालत में उस याचिका पर केंद्र और ECI से जवाब देने को कहा है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए किसी भी काम के लिए कानूनी कार्रवाई से संरक्षण देने वाले प्रावधान को चुनौती दी गई है.
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने सोशल एक्टिविस्ट और एडवोकेट अरुण कुमार अग्रवाल की तरफ से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया. इन 3 जजों की बेंच में सीजेआई सूर्यकांत के अलावा, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं.
यायिका में किस कानून को दी गई चुनौती? याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और अन्य चुनाव आयुक्त (अपॉइंटमेंट, कंडिशन्स ऑफ सर्विस एंड टर्म ऑफ ऑफिस) एक्ट, 2023 की धारा 16 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. इस कानूनी प्रावधान के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को अपने कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कामों के लिए दीवानी या आपराधिक मुकदमों से आजीवन संरक्षण दिया गया है. याचिका में क्या कहा गया? सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में सोशल एक्टिविस्ट की तरफ से कहा गया, ‘ इस तरह की ब्लैंकेट इम्युनिटी के अभाव में भी चुनाव आयोग कई दशकों से सफलतापूर्वक चुनाव कराता रहा है. इससे साफ होता है कि आयोग के सदस्य कानूनी कार्यवाही से पूर्व संरक्षण दिए बिना भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं.' हालांकि, धारा 16 के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों को बिना किसी अपवाद के व्यापक कानूनी संरक्षण दिया गया है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह व्यवस्था असंवैधानिक और अनुचित रूप से व्यापक है और इसे रद्द किया जाना चाहिए. याचिका में कहा गया, ‘ चुनाव आयुक्तों को परेशान करने के इरादे से दायर किए जाने वाले मुकदमों से बचाने का मकसद कम सख्त उपायों के जरिए भी हासिल किया जा सकता है. इसके लिए निराधार शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा और न्यायिक जांच जैसी व्यवस्थाएं अपनाई जा सकती हैं. इसलिए पूर्ण कानूनी संरक्षण देना जरूरत से ज्यादा है और चुनाव आयोग की आजादी की रक्षा के लिए जरूरी सीमा से आगे जाता है.' यह भी पढ़ेंः ‘ अपने मन की कुंठा से PM-HM पर अनर्गल बात करते दिखे', BJP का राहुल गांधी पर हमला

