'SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए, फॉर्म-6 में बदलाव नहीं', विपक्षी दलों की याचिका पर SC में EC का हलफनामा

'SIR के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए, फॉर्म-6 में बदलाव नहीं', विपक्षी दलों की याचिका पर SC में EC का हलफनामा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाने वाली याचिकाओं पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है. आयोग ने याचिकाओं को न्यूज रिपोर्ट पर आधारित बताया है. हलफनामे में कहा गया है कि वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े सभी आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे.

हलफनामे में यह भी साफ किया गया है कि इसे मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ ही दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से दाखिल किया गया है. आयोग ने अपने कामकाज में किसी गड़बड़ी के आरोपों का खंडन किया है. साथ ही, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को काम से रोकने की मांग का विरोध किया है.

मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर देखे कई याचिकाओं पर सुनवाई होगी. चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच जिन मामलों को सुनेगी उनमें सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह, वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी, राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के 13 नेताओं, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी की याचिकाएं शामिल हैं.

इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की बैठकों से जुड़े रिकॉर्ड कोर्ट में तलब करने की मांग की गई है. पूरे मामले की न्यायिक जांच के अलावा फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त को काम से अलग रहने का निर्देश देने की भी मांग भी की गई है. याचिकाकर्ताओं ने देश भर में चल रहे SIR पर भी सवाल उठाया है. 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को मामले में नोटिस जारी किया था.

सुनवाई से पहले मामले में जवाब दाखिल करते हुए

चुनाव आयोग ने कहा है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े जून 2025, अक्टूबर 2025 और मई 2026 के तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए फैसले थे. किसी फाइल पर CEC या चुनाव आयुक्त की ओर से की गई टिप्पणी, सवाल या सुझाव को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता.

आयोग ने बताया कि सामान्य प्रक्रिया में फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद CEC के पास जाती है. जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मंजूरी ली जाती है और बाद में इसे फाइल पर दर्ज किया जाता है.

फॉर्म-6 में नहीं किया कोई बदलाव

चुनाव आयोग ने साफ किया है कि उसने फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया है. इसमें संशोधन करने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है. आयोग ने माना है कि ऑनलाइन आवेदन के फॉर्मेट को देखकर ऐसा लग सकता था कि फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है. इसलिए, 21 अक्टूबर से कागज़ी फॉर्म की तरह ऑनलाइन फॉर्म-6 को भी SIR घोषणा पत्र से अलग किया गया है.

आयोग ने यह भी कहा कि जिन वोटरों के पुराने रिकॉर्ड की मैपिंग नहीं हो पाई है, सामान्य तौर पर उन्हें सुनवाई के लिए बुलाने की जरूरत नहीं है. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे. सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही सुनवाई होगी. जहां संभव होगा, सुनवाई को ऑनलाइन रखा जाएगा.

अपने जवाब में चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि CEC को हटाने के लिए वही संवैधानिक प्रक्रिया अपनानी होती है, जो सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने के लिए निर्धारित है. इसलिए CEC के कामकाज पर रोक लगाने की मांग सुनवाई के योग्य नहीं है.


गोवा के मामले पर क्या बोला चुनाव आयोग? 

गोवा में कथित तौर पर छूटे 97 मतदाताओं के मामले में आयोग ने बताया है कि इसे लेकर कोई विवाद नहीं है. 88 लोग पहले ही मतदाता सूची में किए जा चुके थे, 6 विदेश में थे और 3 के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे. पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में शामिल किए गए लोगों के नाम को लेकर SIR ट्रिब्यूनल के सामने आपत्तियां वहां के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने दाखिल की हैं.

आयोग ने इस बात से भी इनकार किया है कि उसकी तरफ से मीडिया में कोई आंतरिक नोट या फाइल जारी की गई है. आयोग ने कहा है कि दशहरा की छुट्टियों के कारण फिलहाल उसने संक्षिप्त जवाब दाखिल किया है. इसलिए, उसे सभी बिंदुओं पर विस्तृत जवाब देने की अनुमति दी जाए.

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