इंडिया गठबंधन दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ रैली करेगा. इसके लिए विपक्ष ने पूरी तैयारी कर ली है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, प्रियंका गांधी समेत तमाम नेता रैली में शामिल होंगे. इसकी शुरुआत खरगे के आवास से होगी. राहुल गांधी ने रैली का पूरा रूट मैप भी शेयर किया था.
गठबंधन की रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. रैली में विपक्षी दलों की भागीदारी, चुनाव आयोग और एसआईआर के मुद्दे के साथ-साथ कारोबारियों की चिंताओं को लेकर अलग-अलग नेताओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं. एआईएमआईएम ने स्पष्ट किया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उसे रैली के लिए आमंत्रित भी नहीं किया गया है. वहीं, भाजपा और जदयू के नेताओं ने रैली को सत्ता हासिल करने के लिए विपक्ष की बेचैनी करार दिया है. दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने रैली को बड़ा बताते हुए कहा कि इसमें देशभर से लोग शामिल होंगे.
दिल्ली में भाजपा सांसद रवि किशन ने कांग्रेस पर व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीबों की परेशानियों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को उन लोगों से पूछना चाहिए, जिनके जीवन को उसकी नीतियों ने प्रभावित किया है. 2014 के बाद देश भ्रष्टाचार और बड़े घोटालों से बाहर निकला है और अपने पैरों पर खड़ा हुआ है. इसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया. उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस देश में अव्यवस्था क्यों पैदा करना चाहती है और विकास की प्रक्रिया को पीछे क्यों ले जाना चाहती है.
रवि किशन ने आरोप लगाया कि विपक्ष संसद को चलने नहीं दे रहा और देश की प्रगति में बाधा डाल रहा है. उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या वह देश में फिर आतंकवादी हमले, बम धमाके और दंगे चाहती है तथा अनुच्छेद 370 की वापसी की पक्षधर है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि वह वास्तव में क्या चाहती है.
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय ने रैली को लेकर कहा कि एक नवंबर का आयोजन बहुत बड़ा होगा. उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं. उनके बयान से स्पष्ट है कि इंडिया गठबंधन इस रैली के जरिए चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहता है.
रैली को लेकर कारोबारियों की चिंता भी सामने आई है. एनडीटीए के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने कहा कि पिछले दो महीनों में व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है. दीपावली के मौसम में कारोबार बढ़ने की उम्मीद थी और व्यापारियों ने त्योहार को देखते हुए पहले से सामान का स्टॉक कर लिया था. अक्टूबर से फरवरी तक का समय आमतौर पर कारोबार के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन इस बार बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी. अब एक नवंबर को रामलीला मैदान में रैली प्रस्तावित है. व्यापारियों ने पहले ही मांग की थी कि दीपावली के बाद रैली आयोजित की जाए, ताकि बाजारों में खरीदारी प्रभावित न हो. उन्होंने कहा कि दीपावली हिंदुओं का महत्वपूर्ण त्योहार है और धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है. इस दौरान लोग बाजारों में खरीदारी करने पहुंचते हैं, जिससे कारोबारियों को अच्छे व्यापार की उम्मीद रहती है. ऐसे समय में रैली होने से बाजार और व्यापार पर असर पड़ने की आशंका है.

