बिना किसी गुनाह के हत्या के केस में 6 साल तक जेल में रहे एक व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा दिए जाने का आदेश दिया है. उत्तर प्रदेश पुलिस की लापरवाह जांच पर सख्त नाराज़गी जताते हुए कोर्ट ने कई सख्त टिप्पणियां भी की हैं. आदेश में राज्य सरकार से कहा गया है कि वह याचिकाकर्ता को 6 रुपए लाख रुपए दे.
'छीन लिए 6 अनमोल साल'
जस्टिस जे बी पारडीवाला और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिकाकर्ता से गहरी सहानुभूति जताते हुए कहा कि सिर्फ अंदाज़ों और अटकलों पर बनाए गए केस ने एक व्यक्ति के जीवन के अनमोल 6 साल छीन लिए. जजों ने कहा कि न्याय व्यवस्था सिर्फ सजा देने के लिए नहीं है. इसका असल मकसद सभी के साथ न्याय करना है.
क्या है मामला?
मामला 2019 में आगरा के अछनेरा थाने में दर्ज हत्या और अपहरण की एफआईआर से जुड़ा है. 18 अक्टूबर 2019 से लापता एक व्यक्ति की हत्या के शक में 13 नवंबर 2019 को अरुण उर्फ दीपक को गिरफ्तार किया. मामले में शुरू में दी गई शिकायत में अरुण का नाम नहीं था. बाद में पुलिस ने कथित सीसीटीवी फुटेज और एक सह-आरोपी के कबूलनामे के आधार पर उन्हें आरोपी बना दिया.
जांच में कई कमियां
जांच के दौरान पुलिस ने कुछ जली हुई हड्डियां बरामद करने का दावा किया, लेकिन यह साबित नहीं हो सका कि वह हड्डियां लापता व्यक्ति की ही थीं. जिस व्यक्ति की हड्डियां मिलीं, उसकी मौत का कारण भी मेडिकल जांच से साफ नहीं हुआ. मुकदमे के दौरान पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को कानूनी रूप से साबित नहीं कर सकी.
ट्रायल कोर्ट ने किया बरी
ट्रायल कोर्ट में पुलिस ने दावा किया कि आरोपी ने फिरौती की मांग की थी, जबकि शिकायतकर्ता ने ऐसा नहीं कहा था. पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि उसने जो समान बरामद किया था, उसे आरोपियों ने छिपाया था. पुलिस की जांच और सरकारी वकील की तरफ से पेश किए गए मुकदमे में इस तरह की काफी कमियां पाते हुए ट्रायल कोर्ट ने अरुण को बरी कर दिया.
यहां तक कैसे पहुंचा मामला?
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला इस साल मार्च में ही पहुंच गया था. लगभग साढ़े 5 साल जेल में बिताने के बाद अरुण ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. 23 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत तो नहीं दी, लेकिन मामले के तथ्यों पर संदेह जताया. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को 3 महीने में सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया. ट्रायल कोर्ट से अरुण के बरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसका फैसला मंगवाकर उसे पढ़ा.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक महीने के भीतर याचिकाकर्ता को 6 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है. ऐसा नहीं करने पर उसे इस रकम पर 18 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा. कोर्ट ने इस फैसले की कॉपी राज्य के डीजीपी और गृह सचिव को भेजने का भी निर्देश दिया, ताकि पुलिस अधिकारियों को जांच की सही प्रक्रिया के बारे में प्रशिक्षण दिया जा सके

