लेह और कारगिल से होकर गुजरती है पड़ोसी मुल्क की सबसे लंबी नदी, क्या आप जानते हैं इसका नाम?

लेह और कारगिल से होकर गुजरती है पड़ोसी मुल्क की सबसे लंबी नदी, क्या आप जानते हैं इसका नाम?

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। पाकिस्तान और भारत के बीच कई चीजें साझा हैं और इन्हीं में से एक है एक विशाल नदी। क्या आपको मालूम है कि पाकिस्तान में बहने वाली सबसे लंबी नदी कौन-सी है? यह नदी इसलिए भी खास है क्योंकि इसका एक अहम हिस्सा हमारे भारत के दो जिलों से होकर भी गुजरता है। बता दें, यह कोई और नहीं, बल्कि 'सिंधु नदी' है। आइए, एशिया की सबसे लंबी नदियों में शुमार सिंधु नदी के उद्गम, इसके सफर और इतिहास से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातों पर नजर डालते हैं। कहां से जन्म लेती है सिंधु नदी?

सिंधु नदी का उद्गम स्थल तिब्बत है। यह मानसरोवर झील के करीब मौजूद कैलाश पर्वत रेंज के 'बोखर-चू' ग्लेशियर से निकलती है। तिब्बती भाषा में इसे एक बेहद रोचक नाम दिया गया है-'सिंगी खंबन', जिसका अर्थ 'शेर का मुख' होता है। लंबाई और बहाव का दायरा इस नदी का कुल सफर 3, 180 किलोमीटर का है। भारत की बात करें तो यहां यह नदी 1, 114 किलोमीटर तक बहती है। सिंधु नदी का जलग्रहण क्षेत्र काफी विशाल है। यह कुल 11.

65 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जिसका करीब 3. 21 लाख वर्ग किलोमीटर हिस्सा भारतीय सीमा के भीतर आता है। कृषि और सिंचाई के लिहाज से यह नदी बहुत मायने रखती है। कुछ ऐसा है सिंधु नदी का सफर तिब्बत से निकलने के बाद यह नदी उत्तर-पश्चिम की तरफ अपना रुख करती है। सिंधु नदी लद्दाख के 'दमचोक' इलाके से भारत में दाखिल होती है। इसके बाद यह लेह और कारगिल, इन दो जिलों के बीच से बहती हुई आगे बढ़ती है। भारत के बाद यह नदी चिल्लास के रास्ते पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान में प्रवेश करती है। इसके बाद नदी का बहाव दक्षिण दिशा की ओर मुड़ जाता है और आखिरकार कराची शहर के पास एक बड़ा डेल्टा बनाकर यह अरब सागर में समा जाती है। सिंधु का साथ देने वाली नदियां अपने लंबे सफर में सिंधु नदी कई और नदियों को खुद में समेट लेती है: बाईं तरफ से जुड़ने वाली नदियां: इनमें चिनाब नदी, सतलुज और झेलम प्रमुख हैं। इसके साथ ही ब्यास, रावी, सुरु और जास्कर नदियां भी इसी तरफ से सिंधु में मिलती हैं। दाईं तरफ से जुड़ने वाली नदियां: हुंजा, श्योक, गिलगित, काबुल, स्वात, गोमल और कुर्रम नदियां दाईं ओर से आकर सिंधु नदी का हिस्सा बनती हैं। सिंधु जल समझौता, 1960 क्या है?

नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच एक अहम संधि हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते को 'सिंधु जल संधि' कहा जाता है। इस संधि के अनुसार, ब्यास, रावी और सतलज के पानी पर पूरा अधिकार भारत का है। वहीं, चिनाब, झेलम और सिंधु नदी के पानी का ज्यादा हिस्सा पाकिस्तान को दिया गया है। हालांकि, भारत कुछ शर्तों के साथ इन नदियों के पानी का इस्तेमाल बिजली बनाने, सिंचाई और खेती के लिए कर सकता है। समय-समय पर इस समझौते को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आते रहे हैं। यह भी पढ़ें- भारत की इन नदियों को देखना होगा सबसे खास, आप भी देखें खूबसूरत तस्वीरें यह भी पढ़ें- उल्टी दिशा में बहती है भारत की यह इकलौती नदी, साथ जुड़ी है प्रेम, विश्वासघात और अकेलेपन की कहानी को Google न्यूज़ पर फॉलो करें Follow us

jagran.com पर पूरी खबर पढ़ें

सुझाई गई

सामान्य

कहानी रोआल्ड अमंडसेन की, जिनके नाम दर्ज है दुनिया के दोनों ध्रुवों पर सबसे पहले पहुंचने का रिकॉर्ड

सामान्य

डॉक्टरों ने कहा था- 'मां बनना नामुमकिन है', फिर 1978 में ऐसे हुआ चमत्कार! पढ़ें पहले IVF बेबी की कहानी

सामान्य

कोई नियम नहीं, फिर भी हर ट्रक पर क्यों लिखा होता है 'Horn OK Please'? जानिए इसके पीछे का असली लॉजिक