महाराष्ट्र अपडेट्स: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- अरुण फरेरा की गिरफ्तारी अवैध, दो लाख मुआवजा मिलेगा

महाराष्ट्र अपडेट्स:                                   बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा- अरुण फरेरा की गिरफ्तारी अवैध, दो लाख मुआवजा मिलेगा

बॉम्बे हाईकोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अरुण फरेरा की सितंबर 2011 में हुई गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को उन्हें दो लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। फरेरा 2018 के भीमा कोरेगांव मामले में भी आरोपित हैं और वर्तमान में जमानत पर बाहर हैं। जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के और जस्टिस राज वाकोडे की नागपुर पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाया। पीठ ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि पुलिस ने फरेरा को फरार घोषित किया था, जबकि वह 2007 से जेल में बंद थे। सितंबर 2011 में नागपुर जेल से रिहा होते ही उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया। पीठ ने इसे संविधान के अधिकारों और गिरफ्तारी संबंधी सुरक्षा उपायों का उल्लंघन बताया। फरेरा को 2007 में कई मामलों में गिरफ्तार किया गया था। उन सभी मामलों में बरी होने के बाद उन्हें रिहा किया जाना था। जेल से बाहर निकलते ही पुलिस ने उन्हें रोककर गढ़चिरौली पुलिस की ओर से गिरफ्तार दिखा दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने संविधान के अनुच्छेद 21 और 22 का उल्लंघन किया। ये अनुच्छेद जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गिरफ्तारी के खिलाफ संरक्षण से संबंधित हैं।

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