लद्दाख-जम्मू कश्मीर HC में 9 वकीलों को बतौर जज मंजूरी, SC कॉलेजियम की बैठक में फैसला

लद्दाख-जम्मू कश्मीर HC में 9 वकीलों को बतौर जज मंजूरी, SC कॉलेजियम की बैठक में फैसला

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 9 वकीलों को जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट में जज के रूप में नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. गुरुवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया गया है. 

29 अक्टूबर की बैठक में जिन लोगों की सिफारिश की गई है, उनमें विशाल शर्मा, विक्रम कुमार शर्मा, नामग्याल वांगचुक, पवन कुमार कुंडल, ताहिर मजीद शम्सी, तबस्सुम जफर अमित गुप्ता, प्रणव कोहली और अनुपम रैना का नाम शामिल है.

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि कॉलेजियम की 29 अक्टूबर को हुई बैठक में इन वकीलों की नियुक्ति के प्रस्ताव को स्वीकार किया जाता है. इन्हें जम्मू कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के जज के तौर पर मंजूरी दी जाती है. 

11 नामों की, की गई थी सिफारिशें

ये सभी सिफारिशें मुख्य न्यायाधीष अरुण पल्ली की अध्यक्षता वाले उच्च न्यायालय कॉलेजियम की एक पूर्व कोशिशों के बाद आई है. इसने इस साल अप्रैल में हाईकोर्ट के न्यायधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए 11 नामों की सिफारिश की थी. इन सिफारिश में बार कोटे से 10 वकील और बेंच कोटे से एक न्यायिक अधिकारी शामिल थे. ये पिछली सिफारिशें उच्च न्यायालय के रिक्त पदों को भरने का हिस्सा थीं. यहां न्यायधीशों की स्वीकृत संख्या को नवंबर 2024 में 17 से बढ़ाकर 25 कर दिया गया था. 

संविधान में वकीलों को जज बनाने के क्या प्रावधान?

भारत के संविधान के आर्टिकल 217 के तहत किसी वकील को हाईकोर्ट का जज बनने के लिए कम से कम 10 सालों तक किसी हाईकोर्ट या अन्य उच्च अदालत में अधिवक्ता के रूप में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए. इसके लिए भारतीय नागरिक होना आवश्यक है. हाईकोर्ट में जज के रिटायरमेंट की उम्र 62 मानी जाती है. 

क्या है कॉलेजियम सिस्टम, जो करता है जजों की नियुक्ति?

भारत में कॉलेजियम सिस्टम की बात करें तो भारत में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए विशेष प्रणाली है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता ये है कि इसमें जज ही जजों की नियुक्ति करते हैं. यानी कि ज्यूडिशियरी के सीनियर जज मिलकर तय करते हैं कि कौन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का जज बनेगा. 

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