डॉक्टरों ने कहा था- 'मां बनना नामुमकिन है', फिर 1978 में ऐसे हुआ चमत्कार! पढ़ें पहले IVF बेबी की कहानी

डॉक्टरों ने कहा था- 'मां बनना नामुमकिन है', फिर 1978 में ऐसे हुआ चमत्कार! पढ़ें पहले IVF बेबी की कहानी

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं 25 जुलाई का दिन मेडिकल जगत में ऐतिहासिक है। इस दिन कुछ ऐसा हुआ था, जिसने करोड़ों लोगों को जिंदगी में नई उम्मीद दी थी। हम बात कर रहे हैं दुनिया के पहले इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन यानी टेस्ट ट्यूब तकनीक से बच्चे के जन्म की। दरअसल, 25 जुलाई 1978 को दुनिया की पहली टेस्ट ट्यूब बेबी लुईस जॉय ब्राउन का जन्म हुआ था। इस सफलता ने न सिर्फ इतिहास में अपनी जगह बनाई, बल्कि कई करोड़ लोगों को एक नई उम्मीद भी दी। आइए जानें इस बारे में। निसंतान जोड़ों के लिए बना नई उम्मीद लुईस जॉय के जन्म ने इनफर्टिलिटी के इलाज में क्रांति ला दी। इससे उन लाखों-करोड़ों लोगों को उम्मीद मिली, जो किसी शारीरिक समस्या की वजह से नेचुरली कंसीव नहीं कर पा रहे थे। आईवीएफ तकनीक का ये सफर परीक्षण आज दुनियाभर में इन्फर्टिलिटी से जूझ रगे कपल्स के वरदान साबित हो रही है। 20 साल की मेहनत का नतीजा आईवीएफ तकनीक की सफलता के पीछे वैज्ञानिकों को दो दशक यानी 20 सालों तक रिसर्च करनी पड़ी और फिर जाकर इसमें सफलता हासिल हुई। इस तकनीक को विकसित करने में ब्रिटिश वैज्ञानिक डॉ.

रॉबर्ट एडवर्ड्स, स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. पैट्रिक स्टेप्टो और एम्ब्रियोलॉजिस्ट जीन पर्डी का सबसे अहम योगदान रहा। कई सालों तक नाकामियां झेलने के बाद लैब में एग को स्पर्म से फर्टिलाइज करके एम्ब्रेयो तैयार किया गया। जब लेस्ली और जॉन ब्राउन की बदली किस्मत लुईस के माता-पिता लेस्ली और जॉन ब्राउन इनफर्टिलिटी की समस्या से जूझ रहे थे। लेस्ली की फैलोपियन ट्यूब बंद थीं, जिसके कारण नेचुरली कंसीव करना उनके लिए नामुमकिन था। ऐसे में उन्होंने इस एक्सपेरिमेंट का हिस्सा बनने का फैसला किया। वैज्ञानिकों ने लैब में एम्ब्रेयो तैयार किया और उसे लेस्ली के यूटेरस में सफलतापूर्वक इम्प्लांट किया गया। इसके बाद एम्ब्रेयो का विकास लेस्ली के गर्भ में हुआ और 25 जुलाई को लुईस जॉय ब्राउन का जन्म हुआ। नोबेल पुरस्कार से किया सम्मानित आईवीएफ तकनीक के विकास में अहम भूमिका निभाने वाले ब्रिटिश वैज्ञानिक डॉ.

रॉबर्ट जी. एडवर्ड्स को साइंस को पूरी दुनिया ने सलाम किया और साल 2010 में उन्हें मेडिसिन के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह भी पढ़ें- क्‍या आप भी IVF से जुड़े इन 5 म‍िथकों पर करते हैं भरोसा? डॉक्‍टर ने बताया इसके पीछे का सच यह भी पढ़ें- 20 की उम्र में ही महिलाओं का शरीर अंदर से हो रहा कमजोर, बढ़ रही हैं हार्मोन्स से जुड़ी समस्याएं को Google न्यूज़ पर फॉलो करें Follow us

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