उत्तराखंड के एक सुनसान गांव में रह रहे बुजुर्ग दंपति की यह कहानी पलायन, अकेलेपन और रिश्तों के दर्द को बेहद मार्मिक तरीके से दिखाती है. सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म 'पायरे' बताती है कि बुढ़ापे में अपनों का साथ छूट जाने का दर्द कितना गहरा हो सकता है.
बेटे के इंतजार में बीती जिंदगी, फिर खुद ही सजाई चिता, 12 इंटरनेशनल अवॉर्ड जीतकर दुनियाभर में छाई ये फिल्म

