भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पंजाब के संगरूर में राहुल गांधी की तरफ से पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर की गई टिप्पणियों को लेकर पलटवार किया है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इसे लेकर राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से भारत के नेता प्रतिपक्ष वो अपने स्वभाव की उद्दंडता और मन की कुंठा से प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को लेकर अनर्गल बात करते दिखे.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसा भी कह रहे थे कि नशामुक्ति करने तक हमारी सरकार नहीं रहेगी. संकल्प की दृढ़ता किसे कहते है आपको नहीं पता. गृहमंत्री ने नशामुक्त भारत का संकल्प लिया है, तो करके दिखाया और 12 महीने से CRPF में कोई कैजुअल्टी नहीं हुई.
उन्होंने यह भी कहा, ‘ कांग्रेस पार्टी को तय करना चाहिए विक्षिप्त मन स्थिति के नेता की तरफ से आगे का रास्ता कैसे तय कर सकते हैं. पंजाब में तो परमिंदर सिंह ने आवास जाने के लिए भी मना कर दिया.'
पीएम मोदी को दी गई डिबेट की चुनौती पर सुधांशु का तीखा वार
अमित शाह कहते हैं - 3 साल में नशा खत्म कर देंगे। लेकिन यह नहीं बताते हैं कि अडानी के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़े गए हजारों किलो के Drugs का क्या हुआ। अमित शाह लॉ एंड ऑर्डर की बात करते हैं लेकिन पूरा देश जानता है, उन्होंने जेल में गैंगस्टर्स पाल रखे हैं। अमित शाह बताएं कि मणिपुर में क्या स्थिति है, क्योंकि वहां की कानून व्यवस्था के चलते नरेंद्र मोदी मणिपुर भी नहीं जा सकते। : 'इंसाफ रैली' में नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi 📍 संगरूर, पंजाब - Congress (@INCIndia) November 4, 2026
राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बुधवार (4 नवंबर) को राहुल गांधी के पंजाब में दिए गए भाषण के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी को डिबेट करने की चुनौती देने के लिए भी राहुल गांधी पर निशाना साधा. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा, ‘ मुझे लगता है कि दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई अपनी रैली की असफलता को छिपाने के लिए अब राहुल गांधी अपने कुछ तथाकथित सलाहकारों के कहने पर इस तरह के अजीबोगरीब बयान दे रहे हैं. वो कहते हैं कि वो डिबेट करने के लिए तैयार हैं, तो डिबेट के लिए भारत के संविधान निर्माताओं ने सर्वोच्च स्थान संसद को तय किया हुआ है.
उन्होंने कहा, ‘ अगर कोई व्यक्ति विपक्ष का नेता है और वह यह कहता है कि मैं सदन में डिबेट नहीं करना चाहता, तो यह संविधान निर्माताओं की भावना और संविधान की मूल भावना का अपमान है. जब आप संसद के सदस्य हैं, तो आपको जिन लाखों लोगों ने चुनकर भेजा है और देश के करोड़ों लोगों ने जिन संसद सदस्यों को चुनकर सदन में भेजा है, आप सदन में मुद्दों पर बहस करने से इनकार करके उन सबका मजाक उठा रहे हैं. क्योंकि उन्हें भेजा ही इसलिए गया है कि वे वहां मुद्दों पर बहस करें, लेकिन आप तो हमेशा भागते रहते हैं. किसी भी विषय पर चर्चा होती है, तो आप भागने लगते हैं. ये डिबेट की मांग ही ‘ मॉकरी ऑफ पार्लियामेंट' है.'
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