अदालत ने कहा कि संबंधित संपदा के राज्य सरकार में निहित होने की पुष्टि किए बिना कलेक्टर को धारा 4(एच) के तहत कार्यवाही शुरू करने का अधिकार नहीं था. अदालत ने स्पष्ट किया कि इस धारा के प्रावधान सहायक प्रकृति के हैं और राज्य में संपदा के निहित होने से संबंधित मुख्य प्रावधानों से स्वतंत्र होकर इनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
50 साल पुराना जमीन अधिग्रहण केस: पटना HC का बड़ा फैसला, पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को मिलेगा मुआवजा

