कास्टिंग डायरेक्टर और फिल्ममेकर मुकेश छाबड़ा के लिए थिएटर सिर्फ कला का माध्यम नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा है. फिल्मों ने उन्हें लोकप्रियता दी, लेकिन रंगमंच आज भी उनके जुनून और सुकून की वजह है.
300-400 कलाकारों ने दिए ऑडिशन, नए कलाकारों को मंच देने के लिए अपनी जेब से खर्च करते हैं मुकेश छाबड़ा

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